नशे की फ्लाइट बनेगी 31 दिसंबर की रात

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नशे की फ्लाइट बनेगी थर्टी फर्स्ट दिसंबर की रात

लखनऊ। आगामी 31 दिसम्बर की पार्टी में पहली बार कोई न कोई नशा करेंगे। उन्हें शाम को उनका ही कोई दोस्त यानी ‘नशे का रावण’ अंग्रेजी साल की ‘पार्टी’ में ले जाएगा। वहां उन्हें कोई न कोई नशा पहली बार कराया जाएगा।

यही से शुरू होगी किसी नए युवक के शराबी बनाने शुरुआत।यह बात “नशा मुक्त समाज आंदोलन अभियान कौशल का” के ब्लाक प्रभारी पत्रकार नागेंद्र बहादुर सिंह द्वारा एक कार्यक्रम के दौरान कही गई।

उनके अनुसार थर्टी फर्स्ट दिसंबर की नाइट में कोई किसी को पहली बार सिगरेट, हुक्का, चरस, गांजा या भांग पिलाएगा।

तो कोई किसी कोनए साल की पार्टी में कोई किसी को पहली बार बीयर या शराब भी पिलायेगा। कहने का अर्थ यह है कि 31 दिसम्बर की शाम बड़ी खतरनाक होती है।

नए साल के जश्न के नाम पर नशे के सौदागर नए नशेड़ियों की पौध रोपते हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को ऐसी पार्टी में कतई न जाने दें। उन्होंने यह भी कहा कि सभी लोग अंग्रेजी साल का स्वागत सपरिवार करें लेकिन बच्चों को नशे से बचा कर रखिये।

हमारा देश नशामुक्त तभी हो सकेगा जब आज की यह पूरी पीढ़ी आजीवन नशामुक्त रहने का संकल्प ले लेगी। हमें नशे की आपूर्ति के बजाय नशे की मांग पर कड़ा प्रहार करना है।नशे की फ्लाइट बनेगी थर्टी फर्स्ट दिसंबर की रात लखनऊ। आगामी 31 दिसम्बर की पार्टी में पहली बार कोई न कोई नशा करेंगे। उन्हें शाम को उनका ही कोई दोस्त यानी 'नशे का रावण' अंग्रेजी साल की 'पार्टी' में ले जाएगा। वहां उन्हें कोई न कोई नशा पहली बार कराया जाएगा।यही से शुरू होगी किसी नए युवक के शराबी बनाने शुरुआत।यह बात "नशा मुक्त समाज आंदोलन अभियान कौशल का" के ब्लाक प्रभारी पत्रकार नागेंद्र बहादुर सिंह द्वारा एक कार्यक्रम के दौरान कही गई। उनके अनुसार थर्टी फर्स्ट दिसंबर की नाइट में कोई किसी को पहली बार सिगरेट, हुक्का, चरस, गांजा या भांग पिलाएगा। तो कोई किसी कोनए साल की पार्टी में कोई किसी को पहली बार बीयर या शराब भी पिलायेगा। कहने का अर्थ यह है कि 31 दिसम्बर की शाम बड़ी खतरनाक होती है। नए साल के जश्न के नाम पर नशे के सौदागर नए नशेड़ियों की पौध रोपते हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को ऐसी पार्टी में कतई न जाने दें। उन्होंने यह भी कहा कि सभी लोग अंग्रेजी साल का स्वागत सपरिवार करें लेकिन बच्चों को नशे से बचा कर रखिये।हमारा देश नशामुक्त तभी हो सकेगा जब आज की यह पूरी पीढ़ी आजीवन नशामुक्त रहने का संकल्प ले लेगी। हमें नशे की आपूर्ति के बजाय नशे की मांग पर कड़ा प्रहार करना है।