तेल का काला खेल ,रडार पर राजधानी के पेट्रोल पंप ,फिर शिकंजा कसने की तैयारी

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तेल का काला खेल, रडार पर राजधानी के पेट्रोल पंप
पेट्रोल पंपों पर फिर शिकंजा कसने की तैयारी में एसटीएफ
-मेरठ व सीमावर्ती जिलों में छापेमारी के बाद संदिग्ध पेट्रोल पंप मालिकों में दहशत

लखनऊ। साल 2017 में भारतीय जनता पार्टी की भारी जीत के बाद उत्तर प्रदेश के 21 वें मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च को शपथ ग्रहण कर सूबे की कमान संभाली। मुख्यमंत्री बनने के बाद कानून का इकबाल बुलंद करने के लिए अभियान चलाकर गुंडों,बदमाशों और माफियाओं को जेल के सलाखों के पीछे भेजने का सिलसिला शुरू किया।

इसी क्रम में अप्रैल-मई 2017 में जनता की जेब पर डाका डालने वाले पेट्रोल पंपों पर हो रही घटतौली के खिलाफ एसटीएफ ने अभियान चलाकर छापेमारी शुरू की तो राजधानी लखनऊ के करीब चार दर्जन पंपों को सीज ही नहीं बल्कि पंप मालिक समेत तीन दर्जन से अधिक लोगों को सलाखों के पीछे भेजा गया।

राजधानी में आज भी करीब आधा दर्जन पेट्रोल पंप है जो अपनी बेगुनाही नहीं साबित कर पाने की वजह से पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। फिलहाल समय के साथ ही तेल के खेल में शातिर कारोबारी नए-नए तरीके निकाल आज भी घटतौली के साथ ही मिलावटी पेट्रोल धड़ल्ले से बेंच वाहनों की सेहत बिगाड़ रहे हैं।

एसटीएफ ने बीते 3 नवंबर को मेरठ, बागपत व हापुड़ में स्थित नायरा कंपनी के करीब दर्जनभर  पेट्रोल पम्पों को चिन्हित कर जिला प्रशासन के साथ सयुंक्त छापेमारी की। छापेमारी में पांच पेट्रोल पंपों पर कम्पनी द्वारा लगाये गये मदरबोर्ड का बाईपास तैयार कर मशीनों में लगे नॉजल्स को चलाने वाले मदरबोर्ड से अतिरिक्त मदरबोर्ड (चिप) लगाकर घटतौली के साथ ही मिलावटी तेल बेचने का खेल हो रहा था।

बारीकी से जांच के बाद एसटीएफ ने पांच नवंबर को साक्ष्यों के आधार पर तकनीकी गिरोह सरगना,पंप मालिकों समेत आधा दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर तेल के काले कारोबार का खुलासा किया था। वहीं अब एसटीएफ की इस कार्रवाई के बाद से ही मिलावटी व घटतौली करने पेट्रोल-डीजल पंप मालिकों में खलबली मची हुई है।

फिर शुरू हुआ मशीनों में चिप लगाकर घटतौली का खेल

बीते 3 नवंबर को मेरठ से गिरफ्तार मास्टरमाइन्ड देवेन्द्र उर्फ सतेन्द्र ने पूछताछ में बताया कि
साल 2017 में जब एसटीएफ ने पेट्रोल पम्पों पर चिप सिस्टम से धोखाधड़ी करने वाले पम्पों को पकड़ा था। इसके बाद उच्च न्यायालय ने पुरानी मशीनों को निकाल कर पल्सर यूनिट पोटेड (कवर्ड/इन्टेक्ट) लगाने का आदेश दिया था। वर्ष 2019 में पेट्रोल पम्पों पर नई मशीनें आने पर पुरानी मशीनों को स्क्रेपर्स ने खरीद लिया।

इन्हीं पुरानी मशीनों की चिप का इस्तेमाल कर पेट्रोल-डीजल की घटतौली का काम पंप मालिकों ने शुरू कर दिया। सतेन्द्र उर्फ देवेन्द्र कुमार चिप के मदर बोर्ड पर टेंपरिंग के एवज में पम्प मालिकों से 50 से एक लाख तक वसूलता था।

साल 2017 के छापेमारी में एसटीएफ को मिली थी बड़ी सफलता

अप्रैल-मई 2017 में एसटीएफ ने राजधानी लखनऊ के पेट्रोल पंपों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर करीब चार दर्जन पेट्रोल पंपों को सीज करते हुए पंप मालिक समेत कई लोगों को सलाखों के पीछे भेजा था। पेट्रोल पंप पर नॉजल के पल्सर मशीन में छेड़छाड़ कर रिमोट के जरिए घटतौली का खेल खेला जा रहा था।

एसटीएफ की इस सफलता ने काफी सुर्खिया बटोरी थी। वहीं मामले में न्यायालय के आदेश के बाद सभी पेट्रोल पंपों पर पुरानी मशीनों को हटाकर नई पल्सर मशीने लगाने का आदेश हुआ था।

निशाने पर शहर के बाहरी और हाई-वे के पेट्रोल पंप भारत पेट्रोलियम कॉरपारेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) समेत रिलायंस,नायरा व अन्य निजी कंपनियों के एक आंकड़े के मुताबिक लखनऊ में करीब 200 से अधिक पेट्रोल-डीजल पंप हैं। शहरी के बाहरी क्षेत्रों में रिलायंस व अन्य निजी कंपनियों के पेट्रोल पंप स्थित है।

हालांकि इनके दाम कुछ पैसों से लेकर करीब 5-7 रुपयों तक अधिक होते हैं। इण्डियन पेट्रोल पंप के एक मैनेजर के मुताबिक 2017 के बाद सभी पंपों पर हाईटेक टेक्नोलॉजी की मशीने लगाई गई हैं जो पूरी तरह कवरबंद होती है। बावजूद इसके तकनीकी जुगाड़ की मदद से छेड़छाड़ कर घटतौली का खेल आश्चर्यजनक है।

वहीं खास बात यह है कि बीते पांच नवंबर को मेरठ से गिरफ्तार तकनीकी मास्टरमांइड सतेन्द्र उर्फ देवेन्द्र कुमार से पूछताछ और एसटीएफ की जांच में यह सामने आया है कि घटतौली व मिलावटी तेल बेचने का खेल ज्यादातर शहर के बाहरी और हाई-वे पर स्थित पेट्रोल पंपों पर होता है। वहीं अब एसटीएफ की टीमें राजधानी लखनऊ समेत अन्य जिलों के संदिग्ध पंपों पर शिकंजा कसने की तैयारी में लगीं हैं।